ये वोटो की राजनीती देश को कहाँ ले जा कर पटकेगी, कुछ समझ में नहीं आता. कोई कश्मीर में सुरक्षा बलों के अधिकार कम करने की कोशिश कर रहा है और कोई वहां से पूरी तरह से उनकी तैनाती हटाना चाहता है ताकि अलगाववादी ताकते वहां हावी हो जाए और उन राजनेताओं की रोटियां सिकती रहे . उन सब से भी कई कदम आगे जाकर कुछ लोग धार्मिक आरक्षण का मुद्दा उछाल रहे हैं , उछालेंगे भी क्यों नहीं ....क्यों की उन लोगो को मालूम है की हमें सत्ता का सिंहासन प्राप्त करना है तो उसकी सीढिया इस समुदाय के वोटो से ही बनाई जा सकती है . फिर चाहे बाकि के हिन्दुस्तानी जाओ भाड़ में ! वैसे ही आरक्षण के राक्षस ने हिंदुस्तान को बहुत पीछे धकेल दिया है. मेरे समझ में नहीं आता की किसी जाती विशेष में जन्म लेने मात्र से कोई व्यक्ति सरकार से विशेष दर्जा प्राप्त करने का अधिकारी कैसे हो सकता है ? अगर किसी को वास्तविक मदद की आवश्यकता है तो वो है वास्तविक गरीब या असहाय व्यक्ति फिर वो चाहे किसी भी जाती या धर्म का क्यों न हो . लेकिन दम घुटता है ये देख कर की कोई अयोग्य व्यक्ति जब आरक्षण की बैसाखी पर चढ़ कर पद और प्रमोशन प्राप्त कर लेता है और सुयोग्य व्यक्ति आरक्षण के सांप का दंश झेलकर जिंदगी भर के लिए कुंठित हो जाता है. अब वक्त आ गया है की आरक्षण का आधार जातिवादी न हो कर आर्थिक हो लेकिन उन नेताओं का क्या करे जो इस से भी चार कदम आगे जाकर धर्म के आधार पर आरक्षण लागू करके इस देश में ऐसी खाई खोदना चाहते हैं जिसको पाटना किसी के भी वश में नहीं रहेगा.........लेकिन क्या कर सकते हैं देश की नीति निर्धारक नेता ही है और उनकी सोच ,समझ और स्वार्थ देश के आम आदमी से भिन्न है.
हे भगवान् अब तो तू कुछ कर .........देश में कोई तो ऐसा नेता पैदा कर जो वी आई पी की सोच न रख कर एक आम हिन्दुस्तानी जैसी सोच और समझ रखता हो , जिसके व्यक्तिगत स्वार्थों और राजनीतिक स्वार्थों से ऊपर देशहित और देश की जनता का हित हो ,जो राजधर्म के मायने जानता समझता हो और उसे निभाना भी चाहता हो.
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