भारत के साथ पड़ोसियों की बहुत बड़ी समस्या है,एक तरफ पाकिस्तान जैसा छिछोरा पडोसी है जो अपने जन्म से ही भारत के लिए कोई न कोई समस्या खड़ी करता रहा है तो दूसरी तरफ चीन जैसा घुन्ना और धोखेबाज देश है जो लगातार भारत को तरह तरह से परेशान करता रहा है. पाकिस्तान जहा विश्व में आतंकवाद के जन्मदाता और युरेनियम एवम मादक पदार्थो की तस्करी के अड्डे के रूप में जाना जाता है ,वहीँ चीन पूरी दुनिया में माओवादी सोच और धोखेबाज देश के रूप में कुख्यात है. इन दोनों देशों की आजकल खूब पटरी बैठ रही है और इन्होने मिलकर नेपाल जैसे शांत देश को दुनिया भर के आतंकवादियों और तस्करों का " ट्रांजिट पॉइंट" बना दिया है. अमेरिका और भारत जैसी शक्तियों को आँखे दिखने के लिए चीन पाकिस्तान का उपयोग करना चाहता है. इसी लिए पाकिस्तान को बहुत सारा सैन्य सहयोग और आर्थिक मदद दे रहा है ,बदले में पाकिस्तान ने पाक अधिकृत कश्मीर में चीन को हजारों वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्ज़ा दिया है जहाँ से उसको भारत पर नजर रखने के लिए सहूलियत हो गयी है. चीन धीरे धीरे कर के चारों ओर से भारत को घेरता जा रहा है. हिमालय के पार कश्मीर में उसने कब्ज़ा कर ही लिया है ,पाकिस्तान की धरती पर गत दिनों युद्धाभ्यास करके उसने दुनिया को ये सन्देश दे ही दिया है की चीन और पाकिस्तान एक ही थाली के बेंगन है. अब ताज़ा घटनाक्रम में चीन ने ये घोषणा की है की वो हिंद महासागर में स्थित शेसेल्स द्वीप में अपना सैनिक अड्डा स्थापित करने जा रहा है. वहां से उसको भारत समेत पूरे दक्षिण एशिया पर नजर रखने में सहूलियत रहेगी. चीन की दादागिरी तो देखिये दक्षिण चीन सागर में तो वो किसी ओर को घुसने नहीं देता , वहां सैनिक अड्डा तो दूर की बात है कोई व्यापारिक या वैज्ञानिक गतिविधि भी नहीं करने देता जैसे की दक्षिण चीन सागर उसका अपना ख़रीदा हुआ हो,लेकिन हिंद महासागर में वो अपनी हर तरह की गतिविधियाँ चला रहा रहा है. सिर्फ चला ही नहीं रहा है बल्कि अपनी दादागिरी और भारत के कमजोर रवैये की वजह से दिन पर दिन बढ़ा भी रहा है. हिंद महासागर में तो ओ ऍन जी सी के सर्वे पर भी उसको ऐतराज़ है, जबकि खुद वहां सैनिक अड्डा बनाने पर आमादा है. ऐसे करते करते वो दिन दूर नहीं जब वो पूरे हिंद महासागर पर वो ऐसे नाजायज़ कब्ज़ा कर लेगा जैसा उसने दक्षिण चीन सागर पर कर रखा है. अगर चीनी ड्रेगन का विस्तार रोका नहीं गया तो एक दिन भारत के लिए बहुत बड़ा खतरा साबित होगा. आवश्यक है की भारत की विदेश निति में परिवर्तन करके इसको लचीली और ढूल-मूल विदेश निति के बजाय मजबूत और स्पष्ट सोच वाली बनाया जाये और चीनी ड्रेगन के इस तरह के दुस्साहसों का मुंह-तोड़ जवाब दिया जाये.
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