हिंदुस्तान को आज तक "तुष्टिकरण" नाम की बीमारी ने बहुत नुकसान पहुँचाया है. आजादी के वक़्त मोहम्मद अली जिन्ना को तुष्ट करने के लिए हिंदुस्तान के टुकड़े किये गए, तभी से हिंदुस्तान में तुष्टिकरण नाम का शब्द परवान चढ़ निकला. अब तो इसने इतना विकराल रूप अख्तियार कर लिया है की इस तुष्टिकरण के चक्कर में जायज़-नाजायज़ भी देखा जाना दूभर हो गया है. आज हर कदम पर कार्यपालिका,न्यायपालिका,व्यवस्थापिका और लोकतंत्र का तथाकथित चौथा स्तम्भ मीडिया सभी तुष्टिकरण में लगे है, बल्कि इन सबों में होड़ मची हुई है की कही की तुष्टिकरण की दौड़ में कही पिछड़ न जाएँ. कोई किसी समुदाय विशेष को बिना मांगे आरक्षण देने में लगा है, तो कोई उन्हें खुश रखने के लिए देश के सबसे बड़े अपराधी को एयर कंडीशन कमरे में बिठा कर बिरयानी खिला रहा है. उनके लिए विशेष पेकेजो और कल्याणकारी योजनाओं की बरसात सी हो रही है, कही पूरे राज्य को ही विशेष दर्ज़ा हासिल है, की मानो वहा जन्म लेने वाले ऊपर वाले से भी विशेष दर्ज़ा ले कर पैदा हुए है, और फिर जिस मिटटी में पैदा हुए और पले-बढे है उसी को लाल करने में लग जाते है.
चौथा स्तम्भ तो सबसे ही आगे निकल जाने में लगता है, उनमे से कुछ लोग तो जैसे रोटी ही इस चीज़ की खाते है की जितना ज्यादा अल्पसंख्यक, मानवाधिकार और जिहाद जैसे शब्द छापेंगे उतने ही ज्यादा अच्छे कलमकार कहलायेंगे. भारत की पुरातन सभ्यता,संस्कृति और सनातनता का जितना ज्यादा उपहास करेंगे उतना ही अपने आपको गोरवान्वित महसूस करेंगे.
आप इस अल्पसंख्यक शब्द के विरुद्ध एक शब्द तो बोलकर देखिये दुनिया भर के चौथे स्तम्भ खाना पीना, सोना जागना सब छोड़कर तब तक आपके खिलाफ कागज़ काले करते रहेंगे जब तक की पहले और दुसरे स्तम्भ वाले आपको उठाकर अन्दर न कर दे और आपके मुह पर "सांप्रदायिक" होने का राक्षसी मुखोटा न चिपका दे.
बाकि की कोर कसर भारत सरकार शीघ्र पूरी करने की तैयारी में है , राष्ट्रीय सलाहकार परिषद् की 'सलाह' के अनुसार सरकार लक्षित सांप्रदायिक हिंसा निरोधक कानून पारित करने जा रही है, फिर तो अगर आपको रास्ते चलते अगर बेवजह भी किसी ने पीट लिया और अगर वो उस श्रेणी का व्यक्ति है जिस के लिए ये कानून बनाया जा रहा है,तो आपकी भलाई इसी में रहेगी की आप चुपचाप पिटकर अपने घर चले जाये, मुंह से उफ़ भी न निकाले, क्यों की उसने अगर आप की शिकायत कर दी तो आप तो कम से कम 6 महीनो के लिए अन्दर हो जायेंगे , 6 महीनो तक तो आप किसी सुनवाई के भी हक़दार नहीं रहेंगे और 6 महीनो बाद भी आपकी सुनवाई करने वाले वो ही लोग होंगे जो ऐसे कानून बनाने वालो के अधीन तुष्टिकरण कर रहे होंगे, इसलिए भैया अब बच के रहना तुष्टिकरण की आंधी अब तूफान का रूप लेने जा रही है.
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