रविवार, 3 जून 2012

जनरलों की मुसीबतहिंदुस्तान में आजकल जनरलों की हालतधोबी के कुत्ते जैसी हो रखी है, न तो घरके रहे है और न ही घाट के !आज एक और जनरल अपनी कैरियर केमहत्वपूर्ण एक साल को सरकार के हाथों गंवाकर रिटायर हो गए, साथही सरकार की कार्यशैली औरविश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगा गए.पहली बार भारतीय सेना के प्रमुखको अपने ही देश की सरकार के खिलाफअदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा, और उनकी इस ध्रष्टता के लिए शायदउनको अपनी बाकि की जिंदगी अदालतों केचक्कर लगाने में ही बितानी पड़ेगी.क्या करे बेचारे जनरल जो ठहरे, अगरवो जनरल के बजाय कोई दलितया अल्पसंख्यक होते तो हजारों राजनितिक और गैरराजनैतिक संगठन और व्यक्ति उनके पीछेखड़े हो जाते, लेकिन 'जनरल'कभी भी वोट बैंक की परिभाषा मेंनहीं आते, अगर ऐसा होता तो मुलायम,लालू, मायावती और सलमान खुर्शीद सरीखे नेताओं में जनरल के हिमायती बननेकी होड़ सी मच जाती और जनरलको आज ही सेना से लास्ट परेडकी सलामी न लेनी पड़ती, और नही प्रधानमंत्री कार्यालयकी किसी आला अधिकारी की हिम्मत पड़ती की जनरल की देश में सैन्य सामानऔर गोला बारूद की कमी को लेकरप्रधानमंत्री को लिखी गयी अति-गोपनीयचिट्ठी को मिडिया को लीक कर दे.लेकिन क्या करते ? बेचारे 'जनरल' जो ठहरे ! खैर अब तो इस देश में जनरलों को दोयमदर्जे का नागरिक बने रहने की आदतसी पद गई है, क्यों की अगरवो विद्यार्थी है तो उसके प्रथम श्रेणी केअंक होते हुए भी किसी अच्छे संस्थान मेंउसको दाखिला न दिया जाकर किसी 'वोट बैंक' श्रेणी के तृतीयश्रेणी अंको वाले उसी केसहपाठी को सिर्फ इस लिएदाखिला मिलता जिसके लिएवो योग्य नहीं है, लेकिन बेचारा जनरलक्या कर सकता है. अगर वो कोईकर्मचारी या अधिकारी हैतो उसको तो उसी पद से रिटायरहोना है जिस पद परउसकी नियुक्ति हुयी है. हाँ उसका कोईभी मातहत व्यक्ति उस से आगे जाकर उसी का अफसर बन सकता है, जैसेकी यदि कोई जनरल पुलिस में उपनिरीक्षक पद पे नियुक्त होता हैतो उसको तो ये मान लेना चाहिएकी उसे जिंदगी भर उप निरीक्षकही रहना है, या फिर ज्यादा ही उसके सितारे बुलंद है तो वृत निरीक्षक बन केरिटायर हो सकता है, वहीँ उसका कोईमातहत यदि उस विशेष श्रेणी का हुआजिसको हिंदुस्तान में आरक्षित वर्गकहा जाता है तो निश्चितही वो अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक तक पहुँच जायेगा. लेकिन जनरलबेचारा क्या कर सकता है ?अब वो दिन दूर नहीं है जब की रोडवेजकी बस में चढ़ते ही कंडक्टर आपसेजाती प्रमाण पत्र मांगेगा, अगर आपअल्पसंख्यक या एस टी है तो आपको सीट न. १ से १५ तक बैठने का अधिकार है,यदि आप एस सी वर्ग के आरक्षण से सु-संपन्न है तो आपको सीट न. मिलेगा १६ से३०, ओ बी सी वर्ग को उपलब्धतानुसार३१ से ५० न. तक की सीट मिल जाएगी,लेकिन अगर आप अनारक्षित वर्ग का जाती प्रमाण पत्र लेकर बस में चढनेलगे तो कंडक्टर आपको तुरंत नीचे उतारदेगा और कहेगा की बस की छत पर देखलो अगर जगह मिले तो चढ़ जाना औरहाँ ये शर्त है की अगर कोई आरक्षित वर्गका यात्री आ जाता है तो तुझे उसी समय बस की छत पर से भी उतरजाना होगा क्यों की ये सरकारी बस है.क्या करे बेचारा जनरल जो ठहरा !!!


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